<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>जीवनशैली &#8211; Divy Vichar | दिव्य विचार</title>
	<atom:link href="https://newsx.in/archives/category/lifestyle/feed" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>https://newsx.in</link>
	<description>Hindi News &#38; Views</description>
	<lastBuildDate>Mon, 13 Apr 2026 17:02:00 +0000</lastBuildDate>
	<language>en-US</language>
	<sy:updatePeriod>
	hourly	</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>
	1	</sy:updateFrequency>
	<generator>https://wordpress.org/?v=6.9.4</generator>

<image>
	<url>https://newsx.in/wp-content/uploads/2026/01/cropped-DivyVichar-Logo-32x32.png</url>
	<title>जीवनशैली &#8211; Divy Vichar | दिव्य विचार</title>
	<link>https://newsx.in</link>
	<width>32</width>
	<height>32</height>
</image> 
	<item>
		<title>बाबा साहब के सपनों का भारत बनाने, आरक्षण बचाने का संकल्प </title>
		<link>https://newsx.in/archives/1072</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Divy Vichar]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 13 Apr 2026 17:01:59 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तराखंड]]></category>
		<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म/अध्यात्म]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://divyvichar.com/?p=1072</guid>

					<description><![CDATA[बाबा साहब डॉ आंबेडकर जयंती की पूर्व संध्या पर सांस्कृतिक कार्यक्रम  लखनऊ। आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति की ओर से बाबा साहब डॉक्टर भीमराव आंबेडकर की जयंती की पूर्व संध्या पर उनके सपनों का भारत बनाने और आरक्षण बचाने का संकल्प लिया गया। कार्यक्रम की शुरुआत 13 अप्रैल की संध्या लगभग 6 बजे ‘जय भीम’ के &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>बाबा साहब डॉ आंबेडकर जयंती की पूर्व संध्या पर सांस्कृतिक कार्यक्रम </strong></p>



<p>लखनऊ। आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति की ओर से बाबा साहब डॉक्टर भीमराव आंबेडकर की जयंती की पूर्व संध्या पर उनके सपनों का भारत बनाने और आरक्षण बचाने का संकल्प लिया गया।</p>



<p>कार्यक्रम की शुरुआत 13 अप्रैल की संध्या लगभग 6 बजे ‘जय भीम’ के जोशीले गीतों के साथ हुई। पूर्व संध्या पर आयोजित इस सांस्कृतिक संध्या में प्रसिद्ध भीम गीत गायक राम निवास पासवान ने अपनी पूरी मंडली के साथ प्रस्तुति दी। उनके गीतों ने पूरे स्मारक स्थल को भीममय कर दिया और उपस्थित जनसमूह में जबरदस्त उत्साह भर दिया। कार्यक्रम स्थल ‘जय भीम’ के नारों और गीतों से गूंज उठा, जिससे एक प्रेरणादायक और भावनात्मक वातावरण का निर्माण हुआ।समिति के मुख्य  संयोजक अवधेश कुमार वर्मा सहित अन्य पदाधिकारियों ने बताया कि यह आयोजन 13 अप्रैल से प्रारंभ होकर 14 अप्रैल तक लगातार दो दिनों तक चलेगा। कार्यक्रम के दूसरे दिन 14 अप्रैल को बाबा साहब के अनुयायियों के बीच लगभग <strong>10 कुंतल भोजन, फल एवं मिष्ठान वितरण</strong> किया जाएगा, जिससे सामाजिक समरसता और सेवा का संदेश दिया जाएगा। इससे पूर्व आयोजित बैठक में समिति के प्रमुख पदाधिकारियों डॉ. राम सबद जैसवारा, आर.पी. केन, पीएम प्रभाकर, प्रेम चंद्र, लेखराम, बन्नी सिंह, नेकी राम, बिंदा प्रसाद, अजय कुमार आदर्श कोसल एवं धीरेंद्र कुमार सहित अन्य सदस्यों ने भाग लिया और कार्यक्रम की जिम्मेदारियों का विभाजन किया गया। समिति ने प्रदेश के सभी आरक्षण समर्थकों एवं बाबा साहब के अनुयायियों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर कार्यक्रम में सहभागिता करें और बाबा साहब को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करें। यह आयोजन न केवल बाबा साहब के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का माध्यम है, बल्कि सामाजिक न्याय, समानता और अधिकारों के प्रति जागरूकता का भी एक सशक्त प्रयास है।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>प्रसिद्ध गायिका आशा भोसले का निधन</title>
		<link>https://newsx.in/archives/1056</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Divy Vichar]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 12 Apr 2026 17:18:47 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तराखंड]]></category>
		<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म/अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[मनोरंजन]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://divyvichar.com/?p=1056</guid>

					<description><![CDATA[मुंबई । प्रसिद्ध गायिका&#160; आशा भोसले अब हमारे बीच नहीं रहीं ।&#160; उन्होंने 92 साल की उम्र में मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में अंतिम सांस ली। एक दिन पहले ही उन्हें सीने में इंफेक्शन की शिकायत के चलते ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। आशा भोसले के बेटे आनंद भोसले ने मीडिया &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>मुंबई । प्रसिद्ध गायिका&nbsp; आशा भोसले अब हमारे बीच नहीं रहीं ।&nbsp; उन्होंने 92 साल की उम्र में मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में अंतिम सांस ली। एक दिन पहले ही उन्हें सीने में इंफेक्शन की शिकायत के चलते ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।</p>



<p>आशा भोसले के बेटे आनंद भोसले ने मीडिया को बताया कि मां नहीं रहीं, उनका सोमवार को सुबह 11 बजे से लोग उनका अंतिम दर्शन कर सकेंगे और शाम 4 बजे शिवाजी पार्क में उनका अंतिम संस्कार होगा । आशा भोसले और बड़ी बहन लता मंगेशकर के निधन की उम्र एक ही है। लता मंगेशकर ने 6 फरवरी 2022 को 92 साल की उम्र में अंतिम सांस ली थी तो वहीं &nbsp;आशा भोसले ने भी 92 साल की उम्र ही इस दुनिया को अलविदा कह दिया। दोनों ने एक ही दिन यानी रविवार को ही इस जग को अलविदा कहा था।&nbsp;</p>



<p>आशा भोसले का जन्म 8 सितंबर 1933 को महाराष्ट्र के सांगली जिले में हुआ। वे प्रसिद्ध गायक और रंगमंच कलाकार दीनानाथ मंगेशकर की बेटी थीं। छोटी उम्र से ही आशा और लता ने परिवार की जिम्मेदारी संभाली। 1943 में उन्होंने मराठी फिल्म ‘माझा बाल&#8217; में पहला गीत गाया, जबकि 1948 में हिंदी फिल्म ‘चुनरिया&#8217; के गीत ‘सावन आया&#8217; से उन्होंने बॉलीवुड में कदम रखा। आशा भोसले ने 20 से ज्यादा भाषाओं में 12,000 से ज्यादा गाने गाए ।&nbsp;</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>कार्डियोलॉजिस्ट डॉ शरद चंद्रा बोले, तब ईसीजी संभव नहीं था</title>
		<link>https://newsx.in/archives/1025</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Divy Vichar]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 10 Apr 2026 17:50:31 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तराखंड]]></category>
		<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
		<category><![CDATA[प्रादेशिक]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://divyvichar.com/?p=1025</guid>

					<description><![CDATA[डॉ. शरत चंद्रा ने सुनाया 2005 का अनुभव, बताया-कैसे बदली उत्तर प्रदेश में हृदय के उपचार की तस्वीर लखनऊ। सीएसआई के एनआईसी-2026 सम्मेलन के दौरान अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल यूनिवर्सिटी के भीड़ भरे सभागार में जब डॉ. शरत चंद्रा ने बोलना शुरू किया, तो उनका स्वर सिर्फ एक डॉक्टर का नहीं, बल्कि एक बेटे का &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><em><strong>डॉ. शरत चंद्रा ने सुनाया 2005 का अनुभव, बताया-कैसे बदली उत्तर प्रदेश में हृदय के उपचार की तस्वीर</strong></em></p>



<p><em>लखनऊ</em>।  सीएसआई के एनआईसी-2026 सम्मेलन के दौरान अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल यूनिवर्सिटी के भीड़ भरे सभागार में जब डॉ. शरत चंद्रा ने बोलना शुरू किया, तो उनका स्वर सिर्फ एक डॉक्टर का नहीं, बल्कि एक बेटे का भी था जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था की सीमाओं को बहुत करीब से महसूस किया था। उन्होंने वर्ष 2005 की एक घटना साझा की।<br>उन्होंने बताया कि दिसंबर की एक रात करीब 10 बजे चंदौसी स्थित उनके घर से पिता का फोन आया कि बेटा सीने में दर्द हो रहा है, क्या करूं? एक डॉक्टर बेटे के रूप में उन्होंने सहज ही कहा- पापा, कहीं पास में जाकर ईसीजी करा लीजिए। पिता ने कहा कि इस समय रात में ईसीजी कहां हो पाएगा, सुबह ही कराएंगे। डॉ. चंद्रा ने कहा कि उस रात सिर्फ मेरे पिता ही नहीं, मैं भी जागता रहा। अगले दिन ईसीजी सामान्य आया, लेकिन वह रात उनके मन में एक सवाल छोड़ गई कि क्या हमारे पास समय पर इलाज की व्यवस्था है?</p>



<p>उन्होंने कहा कि आज, दो दशक बाद, उसी उत्तर प्रदेश की तस्वीर बदल चुकी है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि अब दिल का दौरा पड़ने पर मरीज को सुबह का इंतजार नहीं करना पड़ता। ‘हृदय सेतु’ जैसे प्रयासों ने बड़े संस्थानों जैसे एसजीपीजीआई, केजीएमयू और डॉ. राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस को जिला अस्पतालों से जोड़ दिया है। उन्होंने कहा कि पहले जहां एंजियोप्लास्टी जैसे उपचार केवल बड़े शहरों तक सीमित थे, वहीं अब सुल्तानपुर, जौनपुर, बहराइच, गोंडा और बस्ती जैसे जिलों में भी यह सुविधा उपलब्ध है। अब मरीज को केवल दूरी नहीं, बल्कि समय से भी लड़ना नहीं पड़ता।<br>अपने संबोधन के अंत में डॉ. चंद्रा ने कहा कि यह बदलाव सिर्फ आंकड़ों का नहीं है, यह भरोसे का बदलाव है। एक समय था जब रात में ईसीजी भी संभव नहीं था, और आज वही प्रदेश जीवन बचाने के लिए हर पल तैयार खड़ा है। यही बदला हुआ उत्तर प्रदेश है, यही उत्तम प्रदेश है।</p>



<p></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>बीमार भारत न तो विकसित हो सकता है और न सशक्त बन सकता है : मुख्यमंत्री</title>
		<link>https://newsx.in/archives/1019</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Divy Vichar]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 10 Apr 2026 17:38:09 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तराखंड]]></category>
		<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
		<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[प्रादेशिक]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://divyvichar.com/?p=1019</guid>

					<description><![CDATA[मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्डियोलॉजिकल सोसायटी ऑफ इंडिया के सम्मेलन ‘एनआईसी-2026’ को किया संबोधित लखनऊ।।तेजी से बदलती जीवनशैली और नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज के बढ़ते खतरे के बीच स्वास्थ्य नीति के केंद्र में अब केवल उपचार नहीं, बल्कि बचाव (प्रिवेंशन) और उपचार (ट्रीटमेंट), दोनों का संतुलित समन्वय अनिवार्य हो गया है। इसी व्यापक दृष्टि को सामने रखते &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्डियोलॉजिकल सोसायटी ऑफ इंडिया के सम्मेलन ‘एनआईसी-2026’ को किया संबोधित</strong></p>



<p>लखनऊ।।तेजी से बदलती जीवनशैली और नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज के बढ़ते खतरे के बीच स्वास्थ्य नीति के केंद्र में अब केवल उपचार नहीं, बल्कि बचाव (प्रिवेंशन) और उपचार (ट्रीटमेंट), दोनों का संतुलित समन्वय अनिवार्य हो गया है। इसी व्यापक दृष्टि को सामने रखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यदि देश को दीर्घकालिक रूप से स्वस्थ और उत्पादक बनाना है, तो चिकित्सा व्यवस्था को इलाज-केंद्रित मॉडल से आगे बढ़ाकर जन-जागरूकता और जीवनशैली में सुधार पर आधारित मॉडल की ओर ले जाना होगा। मुख्यमंत्री शुक्रवार को अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल यूनिवर्सिटी में कार्डियोलॉजिकल सोसायटी ऑफ इंडिया के सम्मेलन ‘एनआईसी-2026’ को संबोधित कर रहे थे।</p>



<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार स्वास्थ्य अवसंरचना और किफायती उपचार के विस्तार पर काम कर रही है। दूसरी ओर, समाज को बीमारियों से पहले ही सुरक्षित करने की रणनीति यानी ‘बचाव’ को प्राथमिकता देना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। यही द्विस्तरीय दृष्टिकोण (मजबूत उपचार व्यवस्था और व्यापक बचाव अभियान) आने वाले भारत की स्वास्थ्य सुरक्षा का आधार बनेगा और ‘विकसित भारत’ की परिकल्पना को वास्तविकता में बदलने की दिशा तय करेगा।</p>



<p>*बचाव को बनाना होगा प्राथमिकता*</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="1024" height="781" src="https://divyvichar.com/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260410-WA0024-1-1024x781.jpg" alt="" class="wp-image-1022" srcset="https://newsx.in/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260410-WA0024-1-1024x781.jpg 1024w, https://newsx.in/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260410-WA0024-1-300x229.jpg 300w, https://newsx.in/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260410-WA0024-1-768x586.jpg 768w, https://newsx.in/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260410-WA0024-1-1536x1172.jpg 1536w, https://newsx.in/wp-content/uploads/2026/04/IMG-20260410-WA0024-1-2048x1562.jpg 2048w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज आज समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय बन चुकी हैं, जबकि भारत की परंपरा में संतुलित आहार और नियमित दिनचर्या हमेशा से स्वस्थ जीवन का आधार रही है। बदलती जीवनशैली के चलते उत्पन्न चुनौतियों के बीच अब स्वास्थ्य के दो प्रमुख आयाम &#8211; बचाव (प्रिवेंशन) और उपचार (ट्रीटमेंट) स्पष्ट रूप से सामने हैं। जहां विशेषज्ञों की स्वाभाविक रुचि उपचार और नवाचार में होती है, वहीं उनका मानना है कि इन बीमारियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए बचाव को प्राथमिकता देनी होगी। जागरूकता अभियान के माध्यम से लोगों को स्वस्थ दिनचर्या अपनाने के लिए प्रेरित करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है, जिससे भविष्य की स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना बेहतर तरीके से किया जा सके।</p>



<p>*आयुष्मान भारत बना सबसे बड़ा स्वास्थ्य सुरक्षा कवच*</p>



<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस तेजी से नॉन-कम्युनिकेबल बीमारियां बढ़ रही हैं और समाज का बड़ा वर्ग इसकी चपेट में आ रहा है, वह गंभीर चिंता का विषय है। पहले गंभीर बीमारी का मतलब पूरे परिवार के लिए आर्थिक संकट होता था, क्योंकि न पर्याप्त स्वास्थ्य संस्थान थे और न ही विशेषज्ञों की उपलब्धता। लेकिन पिछले वर्षों में स्थिति में बड़ा बदलाव आया है। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के माध्यम से आज देश के लगभग 55-60 करोड़ लोगों को प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक की स्वास्थ्य सुरक्षा मिल रही है, जो दुनिया की सबसे बड़ी हेल्थ कवरेज योजनाओं में एक है और आमजन को उपचार की बड़ी चिंता से राहत प्रदान कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2025 में मुख्यमंत्री राहत कोष के माध्यम से लगभग 1400 करोड़ रुपये उपचार के लिए जनता को उपलब्ध कराए गए, जो सरकार की संवेदनशीलता का प्रमाण है। आयुष्मान भारत योजना से वंचित रह गए वर्गों को भी मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना के अंतर्गत शामिल कर स्वास्थ्य सुरक्षा का दायरा बढ़ाया गया है। हाल ही में शिक्षकों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा वर्कर्स, एएनएम तथा मिड-डे मील से जुड़े रसोइयों को भी इस योजना में कवर किया गया है, जिससे समाज का एक बड़ा वर्ग अब स्वास्थ्य सुरक्षा के दायरे में आ गया है और उन्हें प्रभावी लाभ मिल रहा है।</p>



<p>*जागरूकता के बिना नहीं रुकेगी बीमारी की चुनौती*</p>



<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि एक दशक पहले उत्तर प्रदेश में केवल 17 सरकारी मेडिकल कॉलेज संचालित थे, जो 25 करोड़ की आबादी के लिए बेहद अपर्याप्त थे, जबकि आज केंद्र व राज्य सरकार के संयुक्त प्रयासों से उनकी संख्या बढ़कर 81 हो गई है और 2 एम्स भी संचालित हैं। हर जिले में आईसीयू की स्थापना, अनेक स्थानों पर कैथ लैब की शुरुआत, निजी क्षेत्र में सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों का तेजी से विस्तार और पुराने मेडिकल कॉलेजों के इंफ्रास्ट्रक्चर का सुदृढ़ीकरण स्वास्थ्य सेवाओं को नई मजबूती दे रहा है। लखनऊ के एसजीपीजीआई, केजीएमयू और डॉ. राम मनोहर लोहिया चिकित्सा संस्थान के माध्यम से टेली-कंसल्टेशन, टेली-आईसीयू और वर्चुअल आईसीयू सेवाओं को प्रदेशभर के अस्पतालों से जोड़ा गया है। साथ ही मेडिकल डिवाइस पार्क और फार्मा पार्क के जरिए सस्ती और गुणवत्तापूर्ण उपचार व्यवस्था विकसित की जा रही है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने इंगित किया कि इन सभी प्रयासों के बावजूद, यदि जीवनशैली में सुधार और व्यापक जागरूकता अभियान पर समान बल नहीं दिया गया, तो बढ़ती बीमारियों की चुनौती को केवल उपचार के माध्यम से नियंत्रित करना संभव नहीं होगा।</p>



<p>*चिकित्सकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण*</p>



<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां निजी क्षेत्र में कार्यरत चिकित्सकों के लिए परिस्थितियां अपेक्षाकृत सहज हैं, वहीं सरकारी संस्थानों में अत्यधिक मरीजों की भीड़ एक गंभीर चुनौती बन चुकी है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि केजीएमयू में प्रतिदिन 12 से 14 हजार, एम्स दिल्ली में 16 से 17 हजार और एसजीपीजीआई में 10 से 12 हजार तक ओपीडी होती है। ऐसी स्थिति में प्रत्येक मरीज को पर्याप्त समय और गुणवत्तापूर्ण उपचार दे पाना कठिन हो जाता है, और भविष्य में यह दबाव और बढ़ने की आशंका है। उन्होंने कहा कि बदलती जीवनशैली, विशेषकर प्रतिदिन 4 से 6 घंटे स्मार्टफोन के उपयोग ने नई बीमारियों को जन्म दिया है, वहीं डायबिटीज का तेजी से बढ़ता प्रसार भी बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है। इन परिस्थितियों में केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि व्यापक जन जागरूकता अत्यंत आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब यही संदेश डॉक्टरों के माध्यम से समाज तक पहुंचता है, तो उसका प्रभाव अधिक गहरा और स्थायी होता है, इसलिए चिकित्सकों की भूमिका इस अभियान में अत्यंत महत्वपूर्ण है।</p>



<p>*मिलावटी खान-पान और बिगड़ी दिनचर्या सबसे बड़ी चुनौती*</p>



<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि आज की सबसे बड़ी चुनौती बदलती जीवनशैली और खान-पान में बढ़ती मिलावट है। अतीत में लोग समय पर सोते-जागते और संतुलित आहार लेते थे, जबकि आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। दीपावली से पहले चलाए गए अभियान का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि छापेमारी के दौरान हजारों क्विंटल मिलावटी खोवा और पनीर बरामद हुआ, जिससे यह स्पष्ट होता है कि बाजार में खाद्य पदार्थों की शुद्धता पर गंभीर प्रश्नचिह्न है। आज किसी भी समारोह में परोसे जा रहे खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर निश्चित नहीं हुआ जा सकता। इस चुनौती के बीच प्रधानमंत्री द्वारा पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों और योग को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने का प्रयास सराहनीय है, जिसका उदाहरण 21 जून को मनाया जाने वाला ‘विश्व योग दिवस’ है। मुख्यमंत्री ने आह्वान किया कि चिकित्सक और विशेषज्ञ समाज को संयमित दिनचर्या अपनाने, स्मार्टफोन के अत्यधिक उपयोग से बचने और स्वस्थ जीवनशैली के लिए प्रेरित करें, क्योंकि जन जागरूकता ही इस बढ़ती समस्या का सबसे प्रभावी समाधान है।</p>



<p>*स्वस्थ नागरिक ही स्वस्थ समाज और सशक्त राष्ट्र की नींव*</p>



<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार जागरूकता और उपचार दोनों स्तरों पर समान रूप से कार्य कर रही है, ताकि स्वास्थ्य सेवाएं सस्ती, सुलभ और प्रभावी बन सकें। आयुष्मान भारत योजना के माध्यम से बाईपास सर्जरी, एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी जैसी हृदय रोग उपचार सुविधाएं आमजन तक पहुंचाई जा रही हैं, जिससे गरीब वर्ग को भी राहत मिली है। श्रमिक वर्ग में सक्रिय जीवनशैली के कारण हृदय रोग अपेक्षाकृत कम हैं, लेकिन बदलती परिस्थितियों में समय पर स्क्रीनिंग, जागरूकता और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं अत्यंत आवश्यक हैं। मुख्यमंत्री ने देश-विदेश से आए विशेषज्ञों से आह्वान किया कि वे बचाव और उपचार दोनों पक्षों पर समन्वित रूप से कार्य करते हुए ठोस निष्कर्ष प्रस्तुत करें, क्योंकि स्वस्थ नागरिक ही स्वस्थ समाज और सशक्त राष्ट्र की नींव है, और पीएम मोदी के नेतृत्व में ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए बीमारियों से मुक्त समाज का निर्माण अनिवार्य है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सम्मेलन में प्रस्तुत शोधपत्रों और चर्चाओं के माध्यम से इस दिशा में सार्थक और ठोस मार्गदर्शन प्राप्त होगा।</p>



<p>*अटल मेडिकल यूनिवर्सिटी बना नई स्वास्थ्य शिक्षा का केंद्र*</p>



<p>इससे पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत में कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल यूनिवर्सिटी प्रदेश की पहली ऐसी यूनिवर्सिटी है, जिसके साथ सभी मेडिकल कॉलेजों को संबद्ध किया गया है, जो चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम है। इस भव्य कन्वेंशन हॉल में इतनी बड़ी कार्डियोलॉजी कॉन्फ्रेंस का आयोजन गर्व का विषय है और स्वयं वे इस विश्वविद्यालय की स्थापना से लेकर इसकी रूपरेखा तैयार करने की पूरी प्रक्रिया से जुड़े रहे हैं। वर्चुअल उद्घाटन के बाद आज यहां आकर विशेषज्ञों से संवाद का अवसर मिलना उनके लिए विशेष रहा। यह सभागार श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी के विराट व्यक्तित्व के अनुरूप निर्मित हुआ है और यहां इस स्तर का आयोजन होना अपने आप में गौरवपूर्ण है। मुख्यमंत्री ने इसे न केवल उत्तर प्रदेश, बल्कि बदलते भारत के नए स्वरूप का प्रतीक बताते हुए कहा कि जो प्रदेश कभी ‘बीमारू राज्य’ की श्रेणी में गिना जाता था, वही आज देश की अर्थव्यवस्था का एक मजबूत ग्रोथ इंजन बनकर उभर रहा है।</p>



<p>इस अवसर पर सीएसआई के प्रेसिडेंट डॉ. धीमान काहली, प्रेसिडेंट इलेक्ट डॉ. सत्येंद्र तिवारी, जनरल सेक्रेटरी डॉ. बी.पी. सिन्हा, साइंटिफिक चेयरमैन डॉ. हरेंद्र कुमार बाली, प्रदेश सरकार के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी मेडिकल हेल्थ एंड एजुकेशन अमित कुमार घोष, वाइस चांसलर अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल यूनिवर्सिटी मेजर जनरल अमित देवगन, डॉ. ऋषि सेठी, आयोजन सचिव डॉ. शरद चंद्रा और देश और दुनिया के कई वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ और प्रतिनिधि उपस्थित रहे।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>ए आई आधारित एप बताएगा बच्चों में बीमारी</title>
		<link>https://newsx.in/archives/985</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Divy Vichar]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 09 Apr 2026 00:08:42 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तराखंड]]></category>
		<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
		<category><![CDATA[देश]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://divyvichar.com/?p=985</guid>

					<description><![CDATA[लोहिया संस्थान ने लांच किया एप&#160; &#160;भारत का पहला एआई आधारित-असिस्टेड ‘लिवर पूप ऐप’ हुआ लॉन्च लखनऊ।&#160; डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के&#160; बाल हेपेटोलॉजिस्ट एवं गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. पीयूष उपाध्याय ने तीन वर्षों के प्रयास और पिछले डेढ़ वर्ष की गहन मेहनत के बाद भारत का पहला AI-असिस्टेड मोबाइल एप्लिकेशन – “लिवर पूप” (LiverPoop) &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>लोहिया संस्थान ने लांच किया एप&nbsp;</strong></p>



<p>&nbsp;<strong>भारत का पहला एआई आधारित-असिस्टेड ‘लिवर पूप ऐप’ हुआ लॉन्च</strong></p>



<p>लखनऊ।&nbsp; डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के&nbsp; बाल हेपेटोलॉजिस्ट एवं गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. पीयूष उपाध्याय ने तीन वर्षों के प्रयास और पिछले डेढ़ वर्ष की गहन मेहनत के बाद भारत का पहला AI-असिस्टेड मोबाइल एप्लिकेशन – “लिवर पूप” (LiverPoop) – विकसित किया है।</p>



<p>इस ऐप का उद्घाटन संस्थान के निदेशक प्रो. डॉ. सी.एम. सिंह द्वारा किया गया। इस अवसर पर डॉ. विक्रम सिंह&nbsp; &nbsp;मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, डॉ. अरविंद कुमार सिंह, डॉ. प्रद्युम्न सिंह, डॉ. भुवन चंद्र तिवारी, डॉ. दीप्ति अग्रवाल, डॉ. पीयूष उपाध्याय सहित अन्य संकाय सदस्य उपस्थित रहे।</p>



<p>&nbsp;*<strong>ऐप क्या करता है?*&nbsp;</strong></p>



<p>यह ऐप नवजात शिशुओं (0–1 वर्ष) में बिलीरी एट्रेसिया नामक जानलेवा पित्त नली रोग की स्क्रीनिंग करता है। अध्ययन में इसकी सेंसिटिविटी 100% पाई गई है।</p>



<p>&nbsp;*<strong>क्यों है यह ऐप देश के लिए अमृत समान?*&nbsp;</strong></p>



<p>बिलीरी एट्रेसिया एक गंभीर बीमारी है जिसमें 60 दिनों के भीतर ऑपरेशन (कसाई सर्जरी) होने पर बच्चा सामान्य जीवन जी सकता है। 90 दिनों के बाद लीवर इतना क्षतिग्रस्त हो जाता है कि केवल महंगा लीवर ट्रांसप्लांट या मृत्यु ही विकल्प रह जाता है।</p>



<p>&nbsp;*<strong>वैश्विक उपयोगिता*&nbsp;</strong></p>



<p>यह ऐप केवल भारत के लिए नहीं, बल्कि पूरे विकासशील विश्व के लिए उपयोगी है । 22 विदेशी भाषाएँ – अरबी, स्पेनिश, फ्रेंच, रूसी, चीनी, जापानी आदि</p>



<p>SAARC, ASEAN और अफ्रीकी देशों में उपयोग योग्य</p>



<p>प्रवासी श्रमिक भी अपनी भाषा में इसका उपयोग कर सकते हैं।</p>



<p>&nbsp;<strong>मुख्य विशेषताएँ</strong></p>



<p>बहुभाषीय सपोर्ट: 18 भारतीय + 22 विदेशी भाषाएँ</p>



<p>आसान उपयोग:</p>



<p>फोटो लें → स्क्रीन पर टैप करें → AI बताएगा “सामान्य” या “खतरे का संकेत”</p>



<p>रियल-टाइम डेटा: स्वास्थ्य विभाग को तुरंत जानकारी</p>



<p>शून्य अतिरिक्त लागत: कोई प्रिंटिंग या वितरण खर्च नहीं</p>



<p>&nbsp;स्वास्थ्य तंत्र के लिए अवसर</p>



<p>राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत ASHA/आंगनवाड़ी कार्यकर्ता आसानी से उपयोग कर सकती हैं</p>



<p>समय पर पहचान से लीवर ट्रांसप्लांट की जरूरत में ~20% तक कमी संभव।</p>



<p>डॉ. पीयूष उपाध्याय ने बताया</p>



<p>“हमारा उद्देश्य इस बीमारी को जन्म के तुरंत बाद पहचानना है, ताकि कोई भी बच्चा बिना इलाज के न रहे। यह ऐप हर माँ, हर ASHA कार्यकर्ता को सशक्त बनाता है।</p>



<p>भारत को अब पेपर स्टूल चार्ट पर करोड़ों खर्च करने की आवश्यकता नहीं है – AI आधारित यह ऐप ही भविष्य है।”</p>



<p>वेबसाइट (एंड्रॉइड के लिए निःशुल्क डाउनलोड):</p>



<p><a href="https://liverpoop.netlify.app/⁠">https://liverpoop.netlify.app/⁠</a></p>



<p>जल्द ही: Google Play Store एवं Apple App Store पर उपलब्ध</p>



<p></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>आंचल फरस्वाण फेमिना मिस इंडिया उत्तराखंड बनी</title>
		<link>https://newsx.in/archives/898</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Divy Vichar]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 23 Mar 2026 17:20:47 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तराखंड]]></category>
		<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
		<category><![CDATA[मनोरंजन]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://divyvichar.com/?p=898</guid>

					<description><![CDATA[देहरादून। चमोली जिले के किरुली गांव निवासी आंचल फरस्वाण फेमिना मिस इंडिया उत्तराखंड चुनी गई हैं। वह मुंबई में होने वाले फेमिना मिस इंडिया में उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व करेंगी। आंचल की इस उपलब्धि से किरुली गांव सहित पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है। देहरादून में फेमिना मिस इंडिया उत्तराखंड 2026 के ग्रैंड फिनाले का &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p>देहरादून। चमोली जिले के किरुली गांव निवासी आंचल फरस्वाण फेमिना मिस इंडिया उत्तराखंड चुनी गई हैं। वह मुंबई में होने वाले फेमिना मिस इंडिया में उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व करेंगी। आंचल की इस उपलब्धि से किरुली गांव सहित पूरे क्षेत्र में खुशी का माहौल है।</p>



<p>देहरादून में फेमिना मिस इंडिया उत्तराखंड 2026 के ग्रैंड फिनाले का आयोजन किया गया। इसमें 21 प्रतिभागियों ने प्रतिभाग किया। कड़े मुकाबले के बीच आंचल फरस्वाण के सिर पर ताज सजा। आंचल चमोली जनपद के बंड क्षेत्र पीपलकोटी के किरुली गांव निवासी हैं। वर्तमान में उनका परिवार देहरादून में रहता है।</p>



<p></p>



<p>वह देहरादून में फिजियोथेरेपिस्ट की पढ़ाई कर रही हैं। आंचल के पिता रविंद्र फरस्वाण सेना के सूबेदार पद से सेवानिवृत्त हैं। मां गृहिणी हैं। आंचल की उपलब्धि पर पूरे बंड क्षेत्र के लोगों ने प्रसन्नता व्यक्त की है। लोगों को उम्मीद है कि आंचल मिस इंडिया में भी जीत हासिल करके उत्तराखंड के साथ चमोली का नाम रोशन करें</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>हर मंडल में बनेगा लेवल-1 ट्रॉमा सेंटर, डॉक्टरों को मिलेगा विशेष प्रशिक्षण</title>
		<link>https://newsx.in/archives/829</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Divy Vichar]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 17 Mar 2026 17:51:28 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तराखंड]]></category>
		<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
		<category><![CDATA[प्रादेशिक]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://divyvichar.com/?p=829</guid>

					<description><![CDATA[एमबीबीएस डॉक्टरों को छह माह का प्रशिक्षण, डिग्री-डिप्लोमा को मान्यता का प्रस्ताव मरीजों के प्रति संवेदनशील व्यवहार और टीमवर्क पर दिया जाए विशेष जोर लखनऊ।। राज्य में ट्रॉमा केयर व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बड़ा खाका तैयार किया गया है। पांच साल पुराने सभी कॉलेजों में इमरजेंसी मेडिसिन विभाग खोला जाएगा। सभी 18 मंडलों &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>एमबीबीएस डॉक्टरों को छह माह का प्रशिक्षण, डिग्री-डिप्लोमा को मान्यता का प्रस्ताव</strong></p>



<p><strong>मरीजों के प्रति संवेदनशील व्यवहार और टीमवर्क पर दिया जाए विशेष जोर</strong></p>



<p>लखनऊ।। राज्य में ट्रॉमा केयर व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बड़ा खाका तैयार किया गया है। पांच साल पुराने सभी कॉलेजों में इमरजेंसी मेडिसिन विभाग खोला जाएगा। सभी 18 मंडलों में अत्याधुनिक ट्रॉमा सुविधाएं स्थापित की जाएंगी। इसके तहत हाईवे भी चिन्हित किए जाएं। जहां दुर्घटनाओं की अधिक आशंकाएं रहती है और ट्रॉमा सेंटर की सबसे ज्यादा जरूरत है। यह बातें डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कही।<br>वह मंगलवार को केजीएमयू के अटल बिहारी वाजपेई सांइटिफिक कन्वेंशन सेंटर में ट्रॉमा एंड इमरजेंसी केयर रोडमैप फॉर ट्रॉमा एंड इमरजेंसी नेटवर्क विषय पर आयोजित कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा कि सरकारी अस्पतालों के एमबीबीएस डॉक्टरों को ट्रॉमा केयर में दक्ष बनाने के लिए छह माह का विशेष प्रशिक्षण दिया जाए। इस प्रशिक्षण को डिप्लोमा या सर्टिफिकेट के रूप में मान्यता देने की भी सिफारिश की गई है, ताकि डॉक्टरों की विशेषज्ञता को औपचारिक पहचान मिल सके। ट्रॉमा के क्षेत्र के अनुभवी विशेषज्ञ ही इन डॉक्टरों को प्रशिक्षित करेंगे।<br>डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा कि नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ को भी नियमित रूप से प्रशिक्षित किया जाए। क्योंकि ट्रॉमा केयर में पूरी टीम की भूमिका अहम होती है। सभी के समन्वय से ही मरीज की जान बचाई जा सकती है।<br>डिप्टी सीएम ने कहा कि डॉक्टर अपने दायित्वों को समझें। मरीज को परिवार के सदस्य की तरह मानकर इलाज करें। उन्होंने कहा कि केवल दवाएं ही नहीं, बल्कि सहानुभूति और संवेदनशील व्यवहार भी मरीज के इलाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। आयुर्वेद, होम्योपैथिक और एलोपैथिक उपचार के साथ सिम्पैथी भी मरीज को जल्दी ठीक होने में मदद करती है। उन्होंने कहा कि भले ही सभी की जिम्मेदारियां अलग-अलग हों, लेकिन मकसद एक ही है, मरीज की जान बचाना और उसे बेहतर इलाज देना। इससे प्रदेश की ट्रॉमा केयर व्यवस्था में बड़ा सुधार संभव है। इस अवसर चिकित्सा शिक्षा राज्यमंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह, अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अमित कुमार घोष, नीति आयोग के सदस्य डॉ. बीके पाल, मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश अवस्थी, केजीएमयू कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद, चिकित्सा शिक्षा महानिदेशक सारिका मोहन, विशेष सचिव कृतिका सिंह, विशेष सचिव नीलम यादव, उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अजय कुमार सिंह, डॉ. एलडी मिश्रा, स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. पवन कुमार, केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर के सीएमएस डॉ. प्रेम राज, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एनबी सिंह जी, डॉ. केके सिंह समेत अन्य डॉक्टर मौजूद रहे।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>इस बार ज्यादा पड़ेगी गर्मी </title>
		<link>https://newsx.in/archives/688</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Divy Vichar]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 07 Mar 2026 05:45:10 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://divyvichar.com/?p=688</guid>

					<description><![CDATA[मार्च माह में मिल रहा है संकेत, अगले सप्ताह तीन डिग्री बढ़ सकता है तापमान लखनऊ। इस साल ज्यादा गर्मी पड़ने की संभावना है। मार्च माह में ही तापमान अब तक के सभी रिकॉर्ड तोड़ दिया है।&#160;प्रदेश के कई हिस्सों में अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंचने की आशंका है। प्रदेश के कई &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>मार्च माह में मिल रहा है संकेत, अगले सप्ताह तीन डिग्री बढ़ सकता है तापमान </strong></p>



<p>लखनऊ। इस साल ज्यादा गर्मी पड़ने की संभावना है। मार्च माह में ही तापमान अब तक के सभी रिकॉर्ड तोड़ दिया है।&nbsp;प्रदेश के कई हिस्सों में अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंचने की आशंका है।</p>



<p>प्रदेश के कई जिलों में तापमान में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। शुक्रवार को झांसी प्रदेश का सबसे गर्म शहर रहा, जहां अधिकतम तापमान 36.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। इसके अलावा बांदा में 35.6 डिग्री और आगरा में 35.4 डिग्री सेल्सियस अधिकतम तापमान दर्ज किया गया।आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह का कहना है कि अगले सात दिनों तक अधिकतम और न्यूनतम तापमान में करीब  तीन डिग्री सेल्सियस तक और बढ़ोतरी हो सकती है</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>एसजीपीजीआई में बच्चों के कान की जांच होगी आसान </title>
		<link>https://newsx.in/archives/671</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Divy Vichar]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 06 Mar 2026 09:16:40 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://divyvichar.com/?p=671</guid>

					<description><![CDATA[उन्नत न्यूरो-ओटोलॉजी लैब का उद्घाटन लखनऊ। एसजीपीजीआई ने अब बच्चों के कान की जांच आसान हो जाएगी। यह नई अत्याधुनिक तकनीक से युक्त उन्नत न्यूरो आटोलॉजी प्रयोगशाला की शुरुआत हो गई है। प्रयोगशाला का उद्घाटन संस्थान के निदेशक प्रो आर के धीमान ने किया। नई उन्नत प्रयोगशाला में आधुनिक श्रवण परीक्षण उपकरण स्थापित किए गए &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>उन्नत न्यूरो-ओटोलॉजी लैब का उद्घाटन</strong></p>



<p>लखनऊ। एसजीपीजीआई ने अब बच्चों के कान की जांच आसान हो जाएगी। यह नई अत्याधुनिक तकनीक से युक्त उन्नत न्यूरो आटोलॉजी प्रयोगशाला की शुरुआत हो गई है। प्रयोगशाला का उद्घाटन संस्थान के निदेशक प्रो आर के धीमान ने किया।</p>



<p>नई उन्नत प्रयोगशाला में आधुनिक श्रवण परीक्षण उपकरण स्थापित किए गए हैं, जो सामान्य तथा जटिल कोक्लियर इम्प्लांट मामलों की योजना और प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।</p>



<p>निदेशक प्रो. धीमन ने कहा कि सुनने की कमी एक “मूक विकलांगता” है, जो देरी से बढ़ती है लेकिन समय पर हस्तक्षेप से प्रभावी रूप से नियंत्रित की जा सकती है। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार के सहयोग से बच्चों के श्रवण स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए संस्थान की प्रतिबद्धता को दोहराया। कार्यक्रम का समापन इस वर्ष की वैश्विक थीम के अनुरूप सुरक्षित श्रवण प्रथाओं को बढ़ावा देने और सभी बच्चों के लिए समान रूप से श्रवण स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ। इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधीक्षक प्रोफेसर देवेन्द्र गुप्ता और न्यूरोसर्जरी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर अवधेश जैसवाल, प्रोफेसर अनंत मेहरोत्रा, न्यूरो-ओटोलॉजी यूनिट के प्रमुख प्रो रवि शंकर सहित अन्य लोग मौजूद रहे।</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img decoding="async" width="1024" height="682" src="https://divyvichar.com/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260306-WA0027-1024x682.jpg" alt="" class="wp-image-672" srcset="https://newsx.in/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260306-WA0027-1024x682.jpg 1024w, https://newsx.in/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260306-WA0027-300x200.jpg 300w, https://newsx.in/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260306-WA0027-768x512.jpg 768w, https://newsx.in/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260306-WA0027-1536x1023.jpg 1536w, https://newsx.in/wp-content/uploads/2026/03/IMG-20260306-WA0027.jpg 1600w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p></p>



<p>बच्चों को किया जागरूक&nbsp;</p>



<p>लखनऊ। संजय गांधी पी जी आई में हियरिंग केयर फॉर एवरी चाइल्ड&nbsp;थीम के तहत एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम के जरिए बच्चों में सुनने की कमी की समय पर पहचान और शीघ्र हस्तक्षेप के महत्व को रेखांकित करना था।&nbsp;न्यूरोसर्जरी विभाग के न्यूरो-ओटोलॉजी यूनिट के प्रमुख प्रो रवि शंकर और उनकी टीम ने बच्चों में सुनने की समस्या की समय पर पहचान के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि समय रहते पहचान होने से बच्चों के भाषण,&nbsp;भाषा विकास,&nbsp;संज्ञानात्मक क्षमता और सामाजिक विकास पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। उन्होंने इस प्रक्रिया में समुदाय की सक्रिय भागीदारी की आवश्यकता पर भी जोर दिया। पी जी आई परिसर स्थित&nbsp;केन्द्रीय विद्यालय के विद्यार्थियों ने इस कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक भाग लिया और इंटरैक्टिव सत्रों में शामिल हुए। इसके साथ ही कोक्लियर इम्प्लांट सर्जरी करवा चुके बच्चों के अभिभावक तथा संभावित मरीजों के अभिभावक भी कार्यक्रम में उपस्थित रहे और उन्होंने अपने अनुभव साझा किए।</p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
		<item>
		<title>पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने खेली फूलों की होली</title>
		<link>https://newsx.in/archives/607</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Divy Vichar]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 04 Mar 2026 09:57:19 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
		<category><![CDATA[धर्म/अध्यात्म]]></category>
		<guid isPermaLink="false">https://divyvichar.com/?p=607</guid>

					<description><![CDATA[पूर्व कैबिनेट मंत्री शिवपाल सिंह यादव सहित अन्य लोग रहे मौजूद सैफई। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सैफई में फूलों की होली खेली। उन्होंने सामाजिक सौहार्द बढ़ाने और समरसता कायम रखने की अपील की। समारोह में मौजूद पूर्व कैबिनेट मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि होली हमें एकजुटता &#8230;]]></description>
										<content:encoded><![CDATA[
<p><strong>पूर्व कैबिनेट मंत्री शिवपाल सिंह यादव सहित अन्य लोग रहे </strong>मौजूद </p>



<p>सैफई। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सैफई में फूलों की होली खेली। उन्होंने सामाजिक सौहार्द बढ़ाने और समरसता कायम रखने की अपील की। </p>



<p>समारोह में मौजूद पूर्व कैबिनेट मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि होली हमें एकजुटता का संदेश देती है। सभी लोग एकजुट होकर जुल्मी भाजपा सरकार को उखाड़ फेंकने का काम करें।। इस दौरान सांसद डिंपल यादव सहित परिवार के अन्य नेता मौजूद रहे। विभिन्न स्थानों से आए कलाकारों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश किया।</p>



<p></p>



<p></p>
]]></content:encoded>
					
		
		
			</item>
	</channel>
</rss>
