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भुगतान होने पर भी बिजली आपूर्ति बहाल नहीं, उपभोक्ताओं में रोष : वर्मा

उपभोक्ता परिषद ने  सरकार से हस्तक्षेप की उठाई मांग 1912 सुविधा के पूरी तरह नाकामयाब होने का आरोप 

लखनऊ। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने आरोप लगाया कि पूरे उत्तर प्रदेश में संचालित बिजली कंपनियों द्वारा स्मार्ट प्रीपेड मीटर उपभोक्ताओं के साथ गंभीर लापरवाही सामने आ रही है। नेगेटिव बैलेंस होने पर प्रतिदिन लगभग एक से डेढ़ लाख उपभोक्ताओं के बिजली कनेक्शन काटे जा रहे हैं। यह कार्रवाई स्वतः (ऑटोमेटिक) रूप से की जा रही है, लेकिन सबसे गंभीर समस्या यह है कि बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं द्वारा बकाया राशि जमा करने के बाद भी समय से बिजली आपूर्ति बहाल नहीं की जा रही है।

उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष  अवधेश कुमार वर्मा ने बताया कि  प्रकरण की गहन जांच करने पर यह तथ्य सामने आया है कि प्रदेश की सभी बिजली कंपनियों में तकनीकी समन्वय की भारी कमी है। वर्तमान में दो अलग-अलग पेमेंट गेटवे, विभिन्न एमआईएसपी ( मार्केटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर सर्विस प्रोवाइडर) के लगभग 10 अलग-अलग एमडीएम (मीटर डाटा मैनेजमेंट) सिस्टम तथा आरएमएस (रिमोट मैनेजमेंट सिस्टम) कार्यरत हैं। इन सभी प्रणालियों के बीच समुचित समन्वय न होने के कारण भुगतान अपडेट होने में विलंब हो रहा है, जिससे ऑटोमेटिक रूप से बिजली आपूर्ति बहाल नहीं हो पा रही है।

उन्होंने कहा कि  कुछ स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने वाली कंपनियां अपनी क्षमता से कमज़ोर एमडीएम सिस्टम पर अत्यधिक लोड डाल रही हैं, जिससे डेटा प्रोसेसिंग में बाधा उत्पन्न हो रही है। अब वह अपने एमडीएम सिस्टम में पैचिंग कर रहे हैं यानी कि उनकी क्षमता को बढ़ा रही है यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि पावर कॉरपोरेशन द्वारा अधूरी तैयारियों के साथ इस प्रणाली को लागू किया गया, जिसका खामियाजा आम उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है।

बिजली दर सुनवाई में भी उठा है मुद्दा 

उपभोक्ता परिषद द्वारा नोएडा, अयोध्या एवं बरेली में आयोजित बिजली दर सुनवाई के दौरान बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं ने अपनी समस्याएं रखीं और सभी ने एक स्वर में कहा कि उनकी शिकायतों का कोई प्रभावी समाधान नहीं हो रहा है। पावर कॉरपोरेशन द्वारा जारी हेल्पलाइन नंबर 1912 भी इस मामले में पूरी तरह विफल साबित हो रहा है।

उपभोक्ता परिषद ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि इस गंभीर समस्या में तत्काल हस्तक्षेप किया जाए तथा दोषी अधिकारियों एवं संबंधित निजी कंपनियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो इसका व्यापक प्रभाव उपभोक्ताओं के जीवन एवं प्रदेश की छवि पर पड़ेगा। विशेष रूप से वर्ष 2027 में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव से पूर्व इस प्रकार की अव्यवस्थाएं सरकार के प्रति जनता के विश्वास को प्रभावित कर सकती हैं।

अतः उपभोक्ता परिषद सरकार से पुनः आग्रह करती है कि:

  1. भुगतान के तुरंत बाद बिजली आपूर्ति बहाल करने की प्रभावी व्यवस्था लागू की जाए।
  2. सभी तकनीकी प्रणालियों (पेमेंट गेटवे, एमडीएम, आरएमएस) का समुचित एकीकरण सुनिश्चित किया जाए।
  3. दोषी कंपनियों एवं अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर कड़ी कार्रवाई की जाए।
  4. उपभोक्ता शिकायत निवारण प्रणाली को सुदृढ़ किया जाए।

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