उत्तर प्रदेश

 बिजली दर की सुनवाई में फूटा गुस्सा 

सभी प्रतिनिधियों का ने कहा 300 इंडस्ट्री पर एक लाइनमैन तैनात करना मनमानी 

 प्रबंधन पर बिजली बाधित करने के लिए लगाया जाए एस्मा 

लखनऊ। प्रदेश की बिजली कंपनियों की बिजली दर की सुनवाई के क्रम में मंगलवार को मध्यांचल विद्युत वितरण निगम की सुनवाई जनपद बरेली के जीआईसी ऑटो टोरियम में हुई । नियामक आयोग के अध्यक्ष  अरविंद कुमार की अध्यक्षता में संजय कुमार सिंह की उपस्थिति में हुई  बैठक हंगामेदार रही।बरेली में संविदा कार्मिकों की छंटनी का मामला गूंजा।  इंडस्ट्री उपभोक्ता परिषद चेंबर ऑफ कॉमर्स सभी एकजुट होकर कहा कि 300 इंडस्ट्री पर एक लाइन में विद्युत आपूर्ति चौपट हो गई। 

 मध्यांचल विद्युत वितरण निगम की प्रबंध निदेशक  रिया केजरीवाल द्वारा मध्यांचल के कार्यों व टैरिफ पर अपना प्रस्तुतीकरण किया गया। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष केंद्र व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं की तरफ से अपना पक्ष रखते हुए कहा देश में कोई भी कानून उत्तर प्रदेश में बिजली दरों में बढ़ोतरी की इजाजत नहीं देता । फिर भी प्रदेश की बिजली कंपनियां चोर दरवाजे अपने 12000 करोड़ के गैप के आधार पर दरों में बढ़ोतरी चोर दरवाजे चाहती हैं जबकि प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं का बिजली कंपनियों पर 51000 करोड़ से ज्यादा का सरप्लस है अगले 5 वर्षों तक 8% बिजली दर काम की जाए तब उपभोक्ताओं का हिसाब बराबर होगा।

उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा बरेली सहित सभी जनपदों में वर्टिकल व्यवस्था पूरी तरह फेल है संविदा कार्मिकों को बड़े पैमाने पर नौकरी से निकाल दिया गया जिसकी वजह से विद्युत आपूर्ति बाधित होती है एक सब स्टेशन पर केवल तीन गैंग है 24 घंटे के लिए यानी कि एक गैंग और उसे सब स्टेशन पर पांच से छह फीडर यदि उसमें एक साथ दो या तीन फीडर पर ब्रेकडाउन हो जाए तो दूसरे दिन विद्युत आपूर्ति बहाल होगी बरेली जैसे जनपद में 40 से 45 किलोमीटर का फीडर है घंटे बिजली बंद होने की वजह से उसे फीडर के विद्युत उपभोक्ता बिजली उपलब्ध होते हुए भी सही समय पर ब्रेकडाउन ना अटेंड करने की वजह से भारी परेशानी उठाते हैं वहीं लाखों का राजस्व प्रभावित होता है और संविदा कार्मिकों को बाहर का रास्ता दिखाने से दो-चार गैंग कम करने से 26000 से लेकर कुछ फायदा होता है और ब्रेकडाउन के चलते समय से सप्लाई बहाल न होने की वजह से लाखों का नुकसान जो पूरी तरह कहना उचित होगा कि लाखों का नुकसान और हजारों का फायदा बिजली निगम का प्रबंधन बिजली व्यवस्था को तबाह कर रहा है जिस प्रकार से हड़ताल के चलते विद्युत आपूर्ति बाधित होने पर एस्मा लगाया जाता है वैसे प्रबंधन द्वारा संविदा कार्मिकों को बाहर किया जा रहा है जिसकी वजह से विद्युत आपूर्ति समय से बहाल नहीं हो पाती बड़े पैमाने पर विद्युत आपूर्ति बाधित रहती है ऐसे प्रबंधन पर भी एस्मा तामिल किया जाए यह सभी सरकार की छबि मिलकर धूमिल  कर रहे हैं। मध्यांचल विद्युत वितरण निगम की करगुजारियों का खुलासा करते हुए उपभोक्ता परिषद में कहां एयर कंडीशन कमरे में बैठकर उपभोक्ता सेवा नहीं होती उसके लिए तकनीकी विभाग को तकनीकी तरीके से चलाना पड़ता है। मध्यांचल विद्युत वितरण निगम का यह हाल है कि वह संविदा पर रखे गए चपरासियों को हटाकर कहते हैं एक लाइन में जितने अधिकारी बैठे हैं सबको एक चपरासी पानी पिलायेगा ऐसी सोच है कल को प्रबंधन की जगह कोई एसडीएम बैठ जाएगा।

उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा पूरे प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर के उपभोक्ताओं का कनेक्शन प्रीपेड मोड में कर दिया गया हजारों की संख्या में उपभोक्ता नेगेटिव बैलेंस पर रिचार्ज करते हैं उसके बावजूद भी कई घंटे और कुछ मामलों में तो 24 घंटे से ज्यादा बीती हो जाने के बाद भी विद्युत आपूर्ति बहाल नहीं हुई इसके लिए कौन जिम्मेदार है ऐसे प्रबंधन पर सख्त कार्रवाई की जाए पूरा तंत्र विफल हूं। उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने आयोग के सामने एक दो उदाहरण पेश किया कि उपभोक्ता कई कई बार रिचार्ज कर रहे हैं लेकिन उनका रिचार्ज अपडेट नहीं हो रहा है ऐसे में उपभोक्ताओं के साथ अन्याय हो रहा है प्रबंधन पर सख्त कार्रवाई की जाए और उपभोक्ताओं को मुआवजा दिलाया जाए।

उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने गोंडा का उदाहरण देते हुए कहा उपभोक्ता के घर में सौभाग्य योजना में केबल तार पहुंचा दिया गया उसे इलाके में बिजली का खंभा तक नहीं लगा उसका बिल भी आ गया जब ऊर्जा मंत्री की यहां उसने गुहार लगाई तब जाकर उसका बिल शून्य किया गया और उसे कहा गया कि जल्द ही विद्युतीकृत कराया जाएगा यह हाल है मध्यांचल का बिजली दी नहीं बिल दे दिया। उपभोक्ता परिषद ने कहा केंद्र सरकार के आदेश के तहत स्मार्ट प्रीपेड मीटर का खर्च उपभोक्ताओं पर नहीं डाला जा सकता मध्यांचल विद्युत वितरण निगम गलत आंकड़े पेश करके एक एडवाइजरी के सहारे स्मार्ट प्रीपेड मीटर का खर्च उपभोक्ताओं पर डलवाना चाहता है जो गलत है।

बरेली में पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स इंडियन इंडस्ट्री एसोसिएशन राइस मिल एसोसिएशन सहित अनेको जंतु प्रतिनिधियों ने उपभोक्ता परिषद की बात का समर्थन करते हुए कहा वर्टिकल व्यवस्था पूरी तरह फेल है संविदा कार्मिकों को नौकरी से बाहर किए जाने की वजह से आज की स्थिति या हो गई है कि बरेली में 300 इंडस्ट्री पर एक लाइनमैन है विद्युत ब्रेकडाउन होने पर घंटे सप्लाई नहीं मिलती कोई देखने वाला नहीं है।

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