उत्तर प्रदेश

बिल जमा करने के बाद भी कनेक्शन नहीं जोड़ने का आरोप 

उपभोक्ता परिषद ने नियामक आयोग में दाखिल किया याचिका 

लखनऊ। स्मार्ट प्रीपेड मीटर उपभोक्ताओं की  नेगेटिव बैलेंस पर काटी जा रही बिजली बहाली में देरी हो रही है। पॉजिटिव बैलेंस होने के बाद भी उपभोक्ताओं का कनेक्शन कई घंटे नहीं जोड़ा जा रहा है। इस मामले को लेकर उपभोक्ता परिषद ने नियामक आयोग में बिजली कंपनियों के खिलाफ अवमानना याचिका दाखिल कर दिया है।

 उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष केंद्रीय व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य  अवधेश कुमार वर्मा ने बृहस्पतिवार को विद्युत नियामक आयोग पहुंचकर आयोग के चेयरमैन अरविंद कुमार एवं सदस्य संजय कुमार से मुलाकात की । अवमानना याचिका औपचारिक देते हुए सभी बिजली कंपनियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग उठाई । कहां कि स्टैंडर्ड आप परफॉर्मेंस रेगुलेशन 2019 का खुला उल्लंघन हो रहा है।  स्मार्ट प्रीपेड मीटर में पैसा जमा हो जाने के बाद भी 4 से 6 घंटे कहीं और भी अधिक समय तक उपभोक्ताओं की बिजली जुड़ नहीं पा रही , जबकि इस तकनीकी प्रावधान के तहत 15 मिनट में बिजली गिर जानी चाहिए।  ऐसा न होने पर 2 घंटे के बाद मुआवजा मिलना शुरू होना चाहिए।

परिषद ने आयोग के समक्ष प्रस्तुत याचिका में बताया कि प्रदेश में बड़ी संख्या में स्मार्ट प्रीपेड मीटर उपभोक्ताओं की बिजली आपूर्ति नेगेटिव बैलेंस होने पर स्वतः काट दी जाती है, लेकिन रिचार्ज के बाद भी आपूर्ति समय पर बहाल नहीं की जा रही है। कई स्थानों पर उपभोक्ताओं को 4 से 6 घंटे या उससे अधिक समय तक अंधेरे में रहना पड़ रहा है।

विद्युत उपभोक्ता परिषद का कहना है कि स्मार्ट प्रीपेड प्रणाली होने के कारण तकनीकी रूप से रिचार्ज के 15 मिनट के भीतर ही बिजली आपूर्ति बहाल हो जानी चाहिए। इस लापरवाही से प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति भी प्रभावित हो सकती है।

उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने पूरे मामले की जानकारी  ऊर्जा विभाग के अपर मुख्य सचिव नरेंद्र भूषण को भी दी है।  मामले से अवगत कराते हुए कहा कि उपभोक्ताओं के साथ अभिलंब न्याय कराया जाए उन्होंने भरोसा दिया उपभोक्ताओं के साथ न्याय होगा।

परिषद ने आयोग से मांग की है कि—

  • संबंधित विद्युत वितरण कंपनियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए।
  • निर्धारित 2 घंटे की समयसीमा का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराया जाए।
  • उपभोक्ताओं को हुई असुविधा के लिए क्षतिपूर्ति दिलाई जाए।
  • विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 142 के तहत जिम्मेदार अधिकारियों पर दंडात्मक/अवमानना की कार्रवाई की जाए।

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