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स्मार्ट प्रीपेड मीटर मामले में उपभोक्ता परिषद की अवमानना याचिका पर आयोग सख्त

 बिजली कंपनियों को नोटिस जारी,   सभी  कंपनियों के प्रबंध निदेशक को देना होगा 15 दिन में जवाब

लखनऊ। प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर व्यवस्था को लेकर बड़ा विवाद बढ़ता जा रहा है। उपभोक्ता परिषद की ओर से स्मार्ट प्रीपेड मामले में दाखिल अवमानना याचिका पर विद्युत नियामक आयोग ने सभी बिजली कंपनियों को नोटिस भेजा है। प्रबंध निदेशको को 15 दिन में जवाब देना है। 

प्रदेश की सभी बिजली कंपनियों द्वारा लगभग 74,48,263 स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए गए हैं, जिनमें से 69,64,944 उपभोक्ताओं के मीटर बिना पूर्व सूचना के प्रीपेड मोड में परिवर्तित कर दिए गए। इन उपभोक्ताओं में से 5,84,269 उपभोक्ताओं पर लगभग ₹1753 करोड़ का नेगेटिव बैलेंस दर्ज किया गया।

इसी के चलते पावर कॉरपोरेशन द्वारा 13 मार्च से 18 मार्च के बीच “ऑटोमेटिक डिस्कनेक्शन अभियान” चलाया गया, जिसके अंतर्गत 5,79,066 उपभोक्ताओं के बिजली कनेक्शन नेगेटिव बैलेंस के आधार पर स्वतः काट दिए गए। हालांकि, बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं के कनेक्शन रिचार्ज के बाद भी कई घंटों तक बहाल नहीं हो सके, जिससे प्रदेश भर में व्यापक असंतोष और कई स्थानों पर कानून-व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न हो गई।

इस गंभीर स्थिति को देखते हुए उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने ने 19 मार्च 2026 को विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष अरविंद कुमार एवं सदस्य संजय कुमार सिंह से मुलाकात कर एक याचिका प्रस्तुत की। परिषद ने आरोप लगाया कि बिजली कंपनियों ने स्टैंडर्ड ऑफ परफॉर्मेंस विनियमावली 2019  का उल्लंघन किया है।

परिषद का कहना है कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर तकनीक के अनुसार रिचार्ज होते ही बिजली आपूर्ति तुरंत या कुछ ही मिनटों में बहाल हो जानी चाहिए, जबकि वास्तविकता में ऐसा नहीं हुआ। ऐसे मामलों में यदि 2 घंटे से अधिक समय लगता है, तो उपभोक्ताओं को 50 रुपए प्रति दिन के हिसाब से मुआवजा दिया जाना चाहिए । दोषी बिजली कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने प्रदेश की सभी बिजली कंपनियों, पावर कॉरपोरेशन, नोएडा पावर कंपनी और टोरेंट पावर के प्रबंध निदेशकों को नोटिस जारी किया है। आयोग ने 1 फरवरी से 20 मार्च 2026 तक की विस्तृत जानकारी 15 दिनों के भीतर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

आयोग ने इस पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि नकारात्मक बैलेंस के कारण बिजली आपूर्ति काटे जाने के बाद भुगतान या रिचार्ज के कई घंटे बाद तक आपूर्ति बहाल न करना उपभोक्ताओं के अधिकारों का हनन है और स्टैंडर्ड ऑफ परफॉर्मेंस विनियम 2019 का स्पष्ट उल्लंघन है।

आयोग ने सभी बिजली कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे निम्नलिखित विवरण उपलब्ध कराएं:

  • 30 मिनट के भीतर बहाल किए गए कनेक्शनों की संख्या
  • 2 घंटे के भीतर बहाल किए गए कनेक्शनों की संख्या
  • 2 घंटे से अधिक समय में बहाल किए गए कनेक्शनों की संख्या
  • मुआवजा दावा करने वाले उपभोक्ताओं की संख्या
  • कनेक्शन बहाली में हुई देरी के कारण

पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच हो: वर्मा

उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा जिस प्रकार से बिजली कंपनियों ने उदासीनता बरती उससे देश के निजी घरानो को बड़ा लाभ हुआ लेकिन उपभोक्ताओं को सुविधा मिलने की बजाय उन्हें संकट में डाला गया। इसकी गंभीरता से जांच होना जरूरी है। स्मार्ट प्रीपेड मीटर का टेंडर 18885 करोड़ भारत सरकार द्वारा  अनुमोदित किया गया था लेकिन उत्तर प्रदेश में 27342 करोड़ में टेंडर अवार्ड हुआ इसके बावजूद भी रोज कमियां आ रही है गंभीर मामला है।

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