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जबरन प्रीपेड मीटर लगाना कानून का उलंघन- वर्मा


लखनऊ। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने जबरन प्रीपेड मीटर लगाने का आरोप लगाते हुए केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल
खट्टर और ऊर्जा सचिव को पत्र भेजा है।
भेजे गए पत्र में आरोप लगाया कि प्रदेश के उपभोक्ताओं के यहां जबरन प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाया जा रहा है, जबकि उपभोक्ताओं की सहमति लेना अनिवार्य है। बिना उपभोक्ता से पूछे प्रीपेड मीटर लगाना विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा
47(5) का स्पष्ट उलंघन है। उन्होंने मांग की है कि राष्ट्रीय कानून का उलंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। पत्र में बताया कि
आरडीएसएस योजना में लगभग 3.8 करोड़ उपभोक्ताओं के मीटर बदले जा रहे हैं, जिनमें से लगभग 70 लाख उपभोक्ताओं के मीटर बिना उनकी सहमति के प्रीपेड मोड में परिवर्तित कर दिए गए हैं। इसके अतिरिक्त, नए विद्युत कनेक्शन में भी अनिवार्य रूप से प्रीपेड मोड में दिए जा रहे हैं। यह स्थिति तब है, जब‌ 2 अप्रैल 2026 को संसद में ऊर्जा मंत्री खुद स्पष्ट कर चुके हैं कि उपभोक्ता को मीटर चुनने का अधिकार है। उन्होंने मनमानी करने वाले ऊर्जा प्रबंधन के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने, पूरे मामले में उच्च स्तरीय जांच कराने, बिना सहमति के लगाए गए मीटरों को उपभोक्ता की मर्जी के अनुसार लगाने की मांग की है।

बिना उपभोक्ता से पूछे स्मार्ट मीटर को प्रीपेड में बदलने को लेकर विवाद
लखनऊ। प्रदेश में अब स्मार्ट मीटर के प्रीपेड और पोस्टपेड होने को लेकर नया विवाद शुरू हो गया है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि बिना उनकी अनुमति लिए उनके मीटर को प्रीपेड कर दिया गया है। वे अपने मीटर को पोस्टपेड करने के लिए अधिशासी अभियंता को पत्र लिख रहे हैं। सभी कार्यालयों में इस आशय के पत्रों की संख्या बढ़ने लगी है। प्रदेश में 78 लाख उपभोक्ताओं के यहां मीटर लगाए गए हैं। इसमें 70.50 उपभोक्ताओं के यहां प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगा दिया गया है। पिछले दिनों लोकसभा में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री ने बयान देकर स्थिति स्पष्ट कर दी है। उन्होंने साफ कहा कि बिना उपभोक्ता की इजाजत लिए मीटर को पोस्ट या प्रीपेड में नहीं बदला जा सकता है। यह उपभोक्ता पर निर्भर करता है कि वह प्रीपेड मीटर लगवाना चाहता है अथवा पोस्टपेड। उनके इस बयान के सामने आने के बाद ऊर्जा विभाग के कार्यालयों में बिना अनुमति प्रीपेड किए गए मीटरों को
पोस्टपेड में बदलने के लिए आवेदन आने लगे हैं।अधीशासी अभियंताओं का कहना है कि काम का बोझ पहले से है। ऐसे में मीटर को लेकर शुरू हुआ नया विवाद अब अलग तरह की समस्या लेकर आया है। जबकि कार्पोरेशन से उन्हें प्रीपेड मीटर लगाने का ही आदेश दिया गया था। कार्पोरेशन के अधिकारी इस मामले में चुप्पी साधे हुए हैं। निदेशक (वाणिज्य) प्रशांत वर्मा कहते हैं कि प्रीपेड स्मार्ट मीटर उपभोक्ता के लिए ज्यादा फायदेमंद है। वह जितनी बिजली खर्च करेगा, उतने रुपये जमा करते रहेगा। ऐसे में उस पर एकमुश्त भार नहीं पड़ेगा।

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